डोनाल्ड ट्रंप और मेलोनी की जंग में इटली के नेता ने क्यों खोया आपा

डोनाल्ड ट्रंप और मेलोनी की जंग में इटली के नेता ने क्यों खोया आपा

अंतरराष्ट्रीय राजनीति में जब दो बड़े देशों के नेता आपस में भिड़ जाएं, तो हंगामा होना लाजिमी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के बीच इन दिनों कुछ ऐसा ही चल रहा है। दोनों के बीच की कड़वाहट अब इस हद तक बढ़ चुकी है कि सोशल मीडिया पर सरेआम तंज कसे जा रहे हैं। मामला तब और गरमा गया जब ट्रंप की एक हरकत पर इटली के विपक्षी नेता कार्लो कैलेंडा भड़क उठे और उन्होंने ट्रंप को सरेआम 'घटिया और नीच गुंडा' कह डाला।

अगर आप सोच रहे हैं कि अचानक ऐसा क्या हुआ कि एक देश के विपक्षी नेता ने अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए इतने कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया, तो आपको इस पूरी कहानी की तह तक जाना होगा। यह सिर्फ एक सोशल मीडिया पोस्ट का मामला नहीं है। इसके पीछे पुरानी खुन्नस, राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं और अंतरराष्ट्रीय संबंधों का बदलता समीकरण छिपा है।

इस ताजा विवाद की शुरुआत कहां से हुई

तुर्की में होने वाले नाटो (NATO) शिखर सम्मेलन से ठीक पहले डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल (Truth Social) पर एक तस्वीर पोस्ट की। इस तस्वीर में इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी उनकी तरफ देखती नजर आ रही हैं। ट्रंप ने इस फोटो के साथ कैप्शन लिखा, "रेस्ट्रिनिंग ऑर्डर की जरूरत है" (RESTRAINING ORDER NEEDED)।

यह सीधा-सीधा मेलोनी का मजाक उड़ाने और उन्हें उकसाने की कोशिश थी। सच कहें तो अंतरराष्ट्रीय मंच पर किसी संप्रभु देश की महिला प्रधानमंत्री के लिए इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करना किसी को भी नागवार गुजरेगा। इटली में भी ऐसा ही हुआ। भले ही मेलोनी ने इस पर तुरंत कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन इटली की राजनीति में भूचाल आ गया।

कार्लो कैलेंडा क्यों हुए आगबबूला

इटली की विपक्षी पार्टी 'अजियोने' (Azione) के नेता कार्लो कैलेंडा ने जैसे ही ट्रंप की यह पोस्ट देखी, वे खुद को रोक नहीं पाए। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर लिखा कि ट्रंप एक नीच आदमी और घटिया गुंडे हैं। कैलेंडा ने साफ किया कि घरेलू राजनीति में वे भले ही मेलोनी के धुर विरोधी हों, लेकिन जब बात देश के प्रधानमंत्री के सम्मान की आएगी, तो वे चुप नहीं बैठेंगे।

राजनीति को करीब से देखने वाले जानते हैं कि कैलेंडा का यह गुस्सा सिर्फ एक भावुक प्रतिक्रिया नहीं है। यह इटली के उस स्वाभिमान को दिखाता है जिसे ट्रंप अपने बयानों से लगातार चोट पहुंचा रहे हैं। विपक्षी नेता होने के बावजूद मेलोनी के समर्थन में खड़े होकर कैलेंडा ने यह संदेश दिया कि विदेशी हमलों के सामने पूरा इटली एक है।

पुरानी है मेलोनी और ट्रंप की यह रार

यह कोई पहली बार नहीं है जब ट्रंप और मेलोनी के बीच इस तरह की बयानबाजी हुई है। दोनों के बीच पिछले कुछ महीनों से लगातार तनाव चल रहा है। इसकी शुरुआत तब हुई थी जब ट्रंप ने एक इटली के टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में दावा किया था कि फ्रांस में हुए जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान मेलोनी ने उनके साथ फोटो खिंचवाने के लिए 'भीख' मांगी थी।

ट्रंप ने कहा था कि मेलोनी उनके साथ तस्वीर खिंचवाने के लिए इतनी बेताब थीं कि उन्हें मजबूरन फोटो खिंचवानी पड़ी। मेलोनी ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि ट्रंप के ये दावे पूरी तरह से मनगढ़ंत और झूठे हैं। उन्होंने इंस्टाग्राम पर लिखा था कि वे हैरान हैं कि एक अमेरिकी राष्ट्रपति अपने सहयोगियों के साथ ऐसा बर्ताव क्यों कर रहा है।

इसके बाद ट्रंप ने एक और पोस्ट में मेलोनी की लोकप्रियता पर सवाल उठा दिए। उन्होंने कहा कि मेलोनी की लोकप्रियता इटली में लगातार गिर रही है क्योंकि उन्होंने ईरान के मामले में अमेरिका का साथ नहीं दिया। ट्रंप का आरोप था कि मेलोनी ने अमेरिकी सेना को इटली के रनवे इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं दी, जबकि अमेरिका इटली की सुरक्षा के लिए अरबों डॉलर खर्च करता है।

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मेलोनी ने भी पलटवार करने में देर नहीं की। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि उनकी लोकप्रियता किसी अमेरिकी नेता से दोस्ती पर निर्भर नहीं करती, बल्कि इस बात पर निर्भर करती है कि वे इटली के राष्ट्रीय हितों की रक्षा कितनी मजबूती से करती हैं।

इटली सरकार का इस पर क्या रुख है

एक तरफ जहां विपक्ष के कार्लो कैलेंडा ट्रंप को खरी-खोटी सुना रहे हैं, वहीं इटली सरकार के मंत्री इस विवाद को शांत करने की कोशिश में जुटे हैं। नाटो शिखर सम्मेलन के ठीक पहले इटली के रक्षा मंत्री गुइडो क्रोसेतो ने कहा कि अमेरिका के साथ रिश्ते किसी भी व्यक्तिगत विवाद से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं। उनका कहना था कि लोग आते-जाते रहते हैं, लेकिन देशों के बीच के संबंध बने रहते हैं।

इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी ने भी इसी तरह का रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि वे इस तरह के बयानों पर प्रतिक्रिया देकर अमेरिका के साथ अपने संबंधों को कमजोर नहीं करना चाहते। सरकार की यह मजबूरी समझी जा सकती है। अमेरिका इटली का एक बड़ा रणनीतिक साझेदार है और नाटो के मंच पर दोनों को साथ मिलकर काम करना है। ऐसे में सरकार खुलकर ट्रंप से दुश्मनी मोल नहीं ले सकती।

वैचारिक करीबी से जानी दुश्मन बनने का सफर

दिलचस्प बात यह है कि जॉर्जिया मेलोनी कभी डोनाल्ड ट्रंप की बड़ी प्रशंसक हुआ करती थीं। साल 2025 में जब ट्रंप ने राष्ट्रपति पद की शपथ ली, तो मेलोनी यूरोपीय संघ की एकमात्र ऐसी प्रमुख नेता थीं जो उनके शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने वाशिंगटन पहुंची थीं। दोनों के बीच दक्षिणपंथी विचारधारा को लेकर एक स्वाभाविक जुड़ाव दिखता था।

यह दोस्ती तब टूटने लगी जब ट्रंप ने ईरान संघर्ष को लेकर पोप लियो की आलोचना कर दी। मेलोनी ने पोप का बचाव किया और ट्रंप के बयान की निंदा की। यह बात ट्रंप को इतनी चुभ गई कि उन्होंने मेलोनी को डरपोक तक कह दिया। यहीं से दोनों के बीच वह खाई पैदा हुई जो आज इस बदसूरत मोड़ पर पहुंच चुकी है।

यह पूरा घटनाक्रम दिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में कोई भी दोस्ती स्थाई नहीं होती। जब व्यक्तिगत अहंकार और राष्ट्रीय हित आपस में टकराते हैं, तो सालों पुराने वैचारिक गठबंधन भी ताश के पत्तों की तरह ढह जाते हैं। ट्रंप की 'रेस्ट्रिनिंग ऑर्डर' वाली पोस्ट ने यह साफ कर दिया है कि वे आने वाले दिनों में मेलोनी के लिए मुश्किलें कम नहीं करने वाले हैं, और इटली की राजनीति भी अब चुपचाप यह सब बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।

IH

Isabella Harris

Isabella Harris is a meticulous researcher and eloquent writer, recognized for delivering accurate, insightful content that keeps readers coming back.